दोषियो को सजा के स्थान पर रिहाई,लोकतंत्र की हत्या – दीपक गम्भीर* *मुजफ्फरनगर नगर

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के के हत्यारो की रिहाई पर उठाये सवाल। वरिष्ठ समाज सेवी दीपक गम्भीर चीफ वाल्मीकि क्रान्ति ने कहा हम कानून को मानने वाले है। और न्यायपालिका का सम्मान करते है। लेकिन अभी हाल ही में गुजरात की बिलकिसबानो जो कि 5 माह के गर्भ से थी उसके साथ गुजरात गोधरा काण्ड के दंगाईयो ने घर मे घुस कर बलात्कार किया व उसके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या की थी। जिसमे 11 दोषियो को माननीय उच्चतम न्यायालय ने 15 अगस्त 2022 को सभी आरोपियो को रिहा कर दिया। रेप हत्याकांड के आरोपियो की रिहाई के समर्थक ने मिठाई बाँटी। एसे मे पीडिता का मनोबल टूटा और धर्म के आधार पर न्याय हुआ बताया। वहीं दूसरी ओर दिल्ली के छावला रेप केस में 19 साल की लड़की के साथ दरिंदगी के आरोपियो को 7 नवंबर 2022 को तीनों बलात्कारियों को रिहा कर दिया गया।और आज फिर भारत देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी के हत्यारों को मा0 उच्चतम न्यायालय ने बरी कर दिया जोकि एक दुर्भाग्य पूर्ण फैसला है। माननीय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा एक के बाद एक फैसले आरोपियों के हित में आ रहे हैं।जिससे अपराधिक मानसिकता रखने वालों के हौसले बुलंद होंगे।और जनता का कानून से विश्वास उठ जाएगा।जिसका एक उदाहरण उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मे सामने आया जिसमे बी एस एस के पूर्व सैनिक ने अपनी नाबालिक बेटी के बलात्कारी को कोर्ट परिसर में गोली मार दी थी। जबकि एक सैनिक कानून को मानता है और कानून का पालन करता करवाता है। शायद उसका देश की न्यायपालिका से भरोसा उठ गया था। इसलिए उसने कानून को अपने हाथों में लिया। हम इस घटना का समर्थन नहीं करते क्योंकि कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। लेकिन आज ऐसा प्रतीत होता है कि देश में लोकतंत्र नाम की कोई व्यवस्था नहीं है।लोकतंत्र की हत्या हो रही है। ऐसे में हम देश को क्या संदेश दे रहे हैं। कि जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री को ही न्याय नहीं मिला तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करेंगी।

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