विधायक खानपुर उमेश कुमार का  “हरिद्वार की जनता और नेताओं के नाम खुला पत्र” “मैं हरिद्वार हूं”

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विधायक खानपुर उमेश कुमार का 

“हरिद्वार की जनता और नेताओं के नाम खुला पत्र”

“मैं हरिद्वार हूं”

यूँ तो पहाड़ों के हिमालय से निकलने वाली गंगा का वो क्षेत्र हूं जहां कुंभ जैसे विश्वस्तरीय आयोजन होते हैं लेकिन इस हरिद्वार में कुंभ के नाम पर कुछ राजनीतिक लोगों के दामन पाप से भरे हुए भी रहे हैं और ये जनता ने भी खूब देखा है और सुना है!!! 

यूँ तो मेरे पास 11 विधानसभा है जिन पर 11 विधायक जीतकर सदन जाते है लेकिन मुझे मेरा हक़ और सम्मान आज तक नहीं दिला पाये 

मेरी उपेक्षा और दोहन लगातार होता आया है। दुनिया के पटल पर विख्यात इस जनपद का सीना नेताओं ने भ्रष्टाचार से छलनी कर दिया।मुझे इतना ज़ख़्मी कर दिया कि मैं कैंसर की तरह लाइलाज हो गया।

हमने ऐसे सुना था कि लोग पाप धोने इस पावन पवित्र गंगा में आते हैं लेकिन यहां तो कुंभ के नाम पर कुछ राजनीतिक लोगों ने ऐसे पाप किए कि उनके दामन पर ये दाग ताउम्र लगे रहेंगे और उन्हे जनता माफ भी नही करेगी ।। मुझे यहां ऐसे लोगों के नाम बताने की जरूरत भी महसूस नही होती क्योंकि इनके पाप का ग्राफ इतना ऊपर था कि हर समझदार व्यक्ति खुद ही कमेंट बॉक्स में लिख देगा कि किसके दामन पर कुंभ के दाग लगे हैं ।।

हरिद्वार एक ऐसा जिला रहा है जिसकी हमेशा ही उपेक्षा होती रही है यहां की आम जनता बहुत ही भोली भाली और ईमानदार है । उसने बड़े विश्वास के साथ यहां से जनप्रतिनिधियों को चुनकर संसद भेजा….!!! 

 वैसे ये हमारे लिए गर्व का विषय होना चाहिए था कि इस पहाड़ी राज्य में हमारा एक ऐसा हिस्सा भी है जहां किसान जी तोड़ मेहनत करके फसलें उगाता है और एक अन्नदाता के रूप में है , यहां का किसान ऐसा है जो बाढ़ में गंगा का प्रकोप झेलकर भी हिमालय की तरह सीना ताने खड़ा रहता है , सब कुछ सहता है। 

सरकारें आती रही जाती रहीं पर कभी भी हरिद्वार की जनता की किसी ने सुध नहीं ली। 

यहां अगर किसी का विकास हुआ है तो वो उन्ही का हुआ जिन्होंने जिला पंचायत/विधायक की विकास निधियों में भी 40-50 प्रतिशत कमीशन खाया । यहां अगर किसी का विकास हुआ तो सिर्फ उन्ही का हुआ जो कुंभ के सौदागरों के झंडे डंडे उठाते रहे। यहां अगर विकास हुआ है भी तो उनका हुआ जिन्होंने गरीबों के हकों को लूटकर महंगी गाड़ियां और अथाह संपत्ति जुटाई है। लाखों करोड़ इस ज़िले के विकास के लिए केंद्र , वर्ल्ड बैंक और एनी योजनाओं के माध्यम से आया लेकिन सब लूट खाया गया ।

आज हरिद्वार के हर विभाग में कमीशन की लूट है । 40-50 प्रतिशत कमीशन अधिकारियों को देने , 25 प्रतिशत ठेकेदार का लाभ निकालने के बाद बचा 30 प्रतिशत , अब 30 प्रतिशत से बनी सड़क कितने सिन चलेगी ये तो आप अंदाज़ा लगा सकते है।

चकबंदी और तहसील के नाम पर किसान की चप्पलें घिस जाती है लेकिन उसे न्याय नहीं मिलता। खसरा खतौनी के नाम पर जब तक पटवारी के हाथ गर्म ना करो तो पेपर नहीं मिलते नहीं ।टिन शेड शौचालय के लिए ग़रीब कर्जा लेकर रिश्वत ना दे तो उसे इसका लाभ नहीं मिलता । ग़रीब के नाम का टिन शेड शौचालय संपन्न आदमी के घर के आँगन की शोभा बढ़ाता है ।

आज बेरोज़गार सड़कों पर धक्के खा रहा है लेकिन नेता कुछ नहीं कर पाये। सिडकुल कराया गया तो बड़े बड़े उद्योगपतियों ने बेरोज़गारों का शोषण किया। 70 % pप्रतिशत रोज़गार स्थानीय युवाओं को देने के बजाए उन्हें प्रशासन से लाठियाँ पड़वायी।

हमने जब इनके कच्चे चिट्ठे खोले तो तब जनता ने इनका असली खेल देखा कि इनका असल चेहरा क्या है ?? 

आजकल जब हरिद्वार में बाढ आई तो मेरा चंदपूरी का एक किसान भाई पल्लूराम जब आपदा के दौरान खेतों में गया तो उसका अब तहस नहस हो गया था उसने जब ये देखा तो उसे हार्ट अटैक हो गया लेकिन सरकार का कोई नुमाइंदा पूछने वाला नहीं है। 

हरिद्वार की महान जनता ने इस प्रदेश के दो मुख्यमंत्रीयों को यहां से अपना प्रतिनिधि बनाकर चुना…….

 लेकिन हासिल क्या हुआ ?? 

जिन सांसदो ने विकास करने के नाम पर गांव गोद लिए थे पूछिए इन गांव वालों से कि क्या कभी ये आपकी सुध लेने भी आए हैं ?? जवाब कमेंट बॉक्स में जनता खुद ही दे देगी। 

हरिद्वार किसी पहचान का मोहताज नही रहा है लेकिन हरिद्वार की जनता के साथ हमेशा राजनीतिक धोखा हुआ है । आज भी हरिद्वार का आम जन मानस खुद को छला हुआ महसूस कर रहा है । 

हरिद्वार के ग्रामीण/खादर इलाको की बात करूं तो आजतक यहां की ग्रामीण जनता के साथ छल ही होता रहा । सरकारी सिस्टम के साथ सांठगांठ करके बैठे माफिया तंत्र ने तो यहां की ग्रामीण जनता के शौचालयों के रुपए भी चट कर लिए। 

खानपुर विधानसभा क्षेत्र में मैंने ऐसे कई माफियाओं के कच्चे चिट्ठे खोले और आज उनपर कार्यवाही भी हुई। 

हरिद्वार के अन्य कई ग्रामीण इलाकों में गरीब लोगो को न तो टिन शेड शौचालय मिल पाये न आवास मिल पाए न हर घर जल में नल मिल पाए न ही उनकी पेंशन लग पाई न उनको कोई दुख बीमारी में कोई सुविधा मिल पाई। विकास गाँव तक पहुँचा ही नहीं।

मैने खानपुर क्षेत्र में खुद के प्रयासों से मकान बनवाने से लेकर दुख बीमारी में इलाज से लेकर तमाम वो काम डेढ़ वर्षो में करके दिखाए हैं जो आजतक नही हो पाए थे। 

मित्रों। मैं सिर्फ काम करने में विश्वास रखता हूं जबकि आपने देखा होगा कई लोग सिर्फ बुराई और अफवाह फैलाने के अलावा कोई काम नही करते। आज जनता समझदार है इन तथाकथित नेताओं की तरह मूर्ख नही है । यही हमारे लिए संजीवनी है कि आप इन चक्रव्यू में फंसाने वाले नेताओं की चाल समझ चुके हैं । अबतक जो आपको ठगते रहे हैं अब उनको ठिकाने लगाने का समय आ चुका है। 

इन पंक्तियों के साथ आपका साथ चाहता हूं 

–––

मैं हरिद्वार हूं …….  

उत्तराखंड का द्वार हूं ……… 

 दुष्टों का संहार और प्यार करने वालों का करता उद्धार हूं…….

जो अबतक नही हो पाया इस हरिद्वार की पावन धरती पर…. वो करने के लिए तैयार हूं ….. 

बस चाहिए आपका असीम प्रेम और आश्रीवाद….

बस उसी का तलबगार हूं ….!!!!

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